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जम्मू-कश्मीर इतिहास के आईने में
jagran -- 08/19/2008 02:01 PM

श्रीनगर, 18 अगस्त (आईएएनएस)। अपनी समन्वयवादी संस्कृति और विविध धार्मिक आस्थाओं वाले जम्मू कश्मीर राज्य का संक्षिप्त इतिहास, जहां सभी धर्म शांतिपूर्ण वातावरण में विकसित हुए:
* प्राचीन काल में कश्मीर संस्कृत और बौद्ध शिक्षा का केंद्र था।
* चौदहवीं शताब्दी में इस्लाम कश्मीर का प्रमुख धर्म बन गया। कश्मीरी पंडितों में ऋषि परंपरा और सूफी संप्रदाय साथ-साथ विकसित हुए। इस तरह वहां एक समन्वयवादी संस्कृति विकसित हुई।
* अकबर ने सन 1588 में इस क्षेत्र पर हमला किया और कश्मीर मुगल शासन के अधीन हो गया।
* सन 1846 में अंग्रेजों और सिखों के बीच पहले युद्ध में सिखों की आंशिक पराजय के बाद कश्मीर 75 लाख रुपये के बदले गुलाब सिंह के हवाले कर दिया गया।
* सन 1857 के विद्रोह के बाद सामा्रज्य ब्रिटिश शासन के अधीन हो गया और गुलाबसिंह के पुत्र रणबीर शासक बने।
* सन 1925 में रणबीर के पौत्र हरि सिंह ने शासन संभाला।
* सन 1925 में ही कश्मीर का पहला राजनैतिक दल मुस्लिम कांफ्रेंस अस्तित्व में आया और शेख अब्दुल्ला इसके अध्यक्ष बने। सन 1938 में इसका नाम बदल कर नेशनल कांफ्रेंस कर दिया गया।
* अगस्त 1947 में भारत और पाकिस्तान इस बात पर सहमत हो गए कि राजाओं द्वारा शासित राज्यों को यह अधिकार दिया जाएगा कि वे अपने देश का चुनाव खुद करें। हरि सिंह ने पाकिस्तान के साथ एक यथास्थिति समझौते पर हस्ताक्षर किए जिसके मुताबिक पाकिस्तान के साथ व्यापार, यात्रा और संचार चालू रखने की बात कही गई।
* अक्टूबर 1947 में पाकिस्तान के पख्तून कबीले के लोगों ने कश्मीर पर आक्रमण किया। हरि सिंह ने गवर्नर जनरल माउंटबेटन से सहायता की मांग की। भारत सरकार ने इस शर्त पर सहायता करने की बात कही कि हरि सिंह भारत के साथ विलय के पत्र पर हस्ताक्षर करें। हरि सिंह ने ऐसा ही किया और भारतीय सेना ने कश्मीर के अधिकांश हिस्से को कबाइलियों से मुक्त करा लिया। संयुक्त राष्ट्र को मध्यस्थता के लिए आमंत्रित किया गया और उसने इस मसले पर कश्मीर में जनमत संग्रह का सुझाव दिया। पहले तो भारत ने इससे इंकार किया लेकिन बाद में तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू इसके लिए तैयार हो गए।
* एक जनवरी 1948 को भारत ने एक पक्षीय युद्धविराम की घोषणा कर दी। संयुक्त राष्ट्र के घोषणापत्र के अनुच्छेद 35 के तहत भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक शिकायत भी दर्ज कराई।
* सुरक्षा परिषद ने 20 जनवरी 1948 को एक आयोग स्थापित किया और एक प्रस्ताव बनाया जिसे दोनों देशों ने स्वीकार किया। पाकिस्तान पर कश्मीर में अनाधिकार प्रवेश का आरोप लगाते हुए उसे अपनी सेना वापस बुलाने का निर्देश दिया गया। इसके एक वर्ष बात संयुक्त राष्ट्र ने जनमत संग्रह संबंधी एक प्रस्ताव पारित किया।
* शेख अब्दुल्ला 17 मार्च 1948 को राज्य के प्रथम प्रधानमंत्री बने।
* एक जनवरी 1949 को भारत और पाकिस्तान औपचारिक रूप से युद्धविराम पर सहमत हो गए।
* सन 1949 में ही जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाला अनुच्छेद 370 संविधान में जोड़ा गया।
* सन 1953 में शेख अब्दुल्ला को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया। उन पर राज्य के विरुद्ध षड़यंत्र रचने का आरोप लगाया गया।
* सन 1965 में पाकिस्तान ने भारत पर आक्रमण किया। उसकी पराजय के बाद दोनों देशों के मध्य ताशकंद समझौता हुआ।
* सन 1972 में भारत-पाक के बीच शिमला समझौता हुआ जिसमें नियंत्रण रेखा का सम्मान करने का प्रस्ताव पारित किया गया।
* सन 1975 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और शेख अब्दुल्ला ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए जिसके तहत वह भारत की संवैधानिक इकाई बना और शेख अब्दुल्ला राज्य के मुख्यमंत्री बने।
* सन 1980 में राज्य में हुए चुनावों में हेराफेरी के इल्जाम लगे।
* सन 1987 में श्रीनगर में हुए भ्रष्टाचार और कुशासन संबंधी प्रदर्शन भारत विरोधी प्रदर्शन में तब्दील हो गए।
* सन 1989 में वहां आतंकवाद की शुरुआत हुई। कश्मीरी पंडित घर छोड़कर निकल भागे और राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया।
* सन 1989 से अब तक घाटी में आतंकवादी और अंतर्राष्ट्रीय जेहादी सक्रिय हैं। सन 1996 और 2002 में हुए चुनावों से वहां लोकतांत्रिक प्रक्रिया दोबारा शुरू हुई है लेकिन हिंसा अभी भी जारी है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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