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जानवर
पढ़ा रहे है इंसानियत का पाठ !
jagran --
08/18/2008 04:01 PM
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भोपाल। वे कहने के लिए तो जानवर है मगर आज के सभ्य समाज को
इंसानियत का पाठ पढ़ाने की कोशिश कर रहे है।
बंदरिया, बिल्ली, कुत्ता और गाय का बछड़ा आम तौर पर एक दूसरे के करीब आना पसंद
नहीं करते, मगर मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले में ये एक कुनबे के सदस्य बन गए
है। ये चारों एक साथ न केवल उछलकूद करते है बल्कि जरूरत पड़ने पर स्तनपान कराने
में भी परहेज नहीं करते।
नरसिंहपुर जिले के बम्हनी गांव के रहने वाले दौलत सिंह पटेल के घर के आंगन का
नजारा ही निराला होता है। जहां बंदरिया, बिल्ली, कुत्ता और गाय का बछड़ा इस तरह
उछलकूद करते नजर आते है जैसे वे एक ही प्रजाति के सदस्य हों। सात साल की बंदरिया
इस चार सदस्यीय कुनबे की सबसे बुजुर्ग सदस्य है और उसे नाम दिया गया है यशोदा।
वहीं बिल्ली को राधा के नाम से पुकारा जाता है। राधा जब दौलत सिंह के घर आई थी
तब वह बहुत छोटी थी और बंदरिया को देखकर डर जाती थी। आगे चलकर यशोदा और राधा के
बीच कुछ इस तरह की यारी हुई कि वे मां-बेटी की तरह रहने लगीं। इन दो सदस्यों के
परिवार में एक कुत्ता और एक बछडे़ का इजाफा हुआ। इस तरह परिवार में सदस्यों की
संख्या बढ़कर चार हो गई। इन चारों सदस्यों के बीच कभी मारकाट जैसी स्थिति नहीं
बनी बल्कि प्यार दिनों दिन बढ़ता गया।
दौलत सिंह बताते है कि बिल्ली और कुत्ता ऐसे खेलते है जैसे भाई बहन हों। यही
आलम बंदरिया और बिल्ली-कुत्ते का है। अब तो दौलत सिंह के परिवार के बच्चे भी इन
जानवरों की भाषा को जानने लगे है। वे कहते है कि ये जानवर हमें प्यार और
इंसानियत का पाठ पढ़ा रहे है, जिसे इंसान भूल चला है।
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