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इस्तीफा देंगे मुशर्रफ!
jagran -- 08/13/2008 06:19 PM

इस्लामाबाद। बढ़ते दबाव के मद्देनजर पाकिस्तान के पूर्व सैन्य शासक और वर्तमान राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ पद से इस्तीफा देने के समझौते पर तैयार हो गए हैं और मीडिया रिपोर्टो के अनुसार वह पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के दिन 14 अगस्त को इस्तीफे की घोषणा करेंगे।

डेली टाइम्स ने विपक्ष के पीएमएल-क्यू के एक वरिष्ठ नेता के हवाले से खबर प्रकाशित की है कि मुशर्रफ संसद में उनके खिलाफ लाए गए महाभियोग के प्रस्ताव से पहले इस्तीफा देते हैं तो पीपीपी नीत गठबंधन सरकार द्वारा उन्हें सुरक्षित जाने दिया जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार मुशर्रफ को सुझाव दिया गया है कि वह इस्तीफा देने से पूर्व देश के लोगों तथा सुप्रीमकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और अन्य न्यायाधीशों को बर्खास्त करने के लिए न्यायपालिका से माफी मांगे और न्यायाधीशों को फिर से पद पर बहाल करें। इसके अलावा उन्हें पिछले साल राष्ट्रपति के रूप में उनके चुनाव और नवंबर में अंतरिम संवैधानिक आदेश के तहत देश में आपातकाल की वैधता के संबंध में न्यायपालिका का जो भी निर्णय आए उसे स्वीकार करने का भी सुझाव दिया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन सलाहों के संबंध में मुशर्रफ ने क्या निर्णय लिया है इसका पता नहीं चल पाया है। इस्तीफा देने के बाद राष्ट्रपति कानून के तहत कुछ समय के लिए वह राष्ट्रपति भवन में रह सकते हैं, जब तक कि वह इस्लामाबाद के बाहरी इलाके चाक शहजाद में बने अपने नए घर में न चले जाएं और इसके कुछ ही सप्ताह बाद उनके देश छोड़ने की संभावना जताई जा रही है।

सत्तारूढ़ गठबंधन के नेताओं ने मंगलवार को कहा कि संसद में मुशर्रफ के खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव तथा आरोपपत्र अगले सप्ताह तक प्रस्तुत हो जाने की संभावना है। चार प्रांतीय असेंबलियों द्वारा मुशर्रफ से विश्वासमत हासिल करने के प्रस्ताव पारित होने के बाद ही उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया जाएगा।

विश्वास मत हासिल करने का प्रस्ताव पंजाब तथा पश्चिमोत्तार प्रांत की प्रांतीय असेंबलियों ने पहले ही पारित कर दिया है। ऐसी आशा व्यक्त की जा रही है कि सिंध तथा ब्लूचिस्तान की असेंबलियों द्वारा भी इसी सप्ताह उक्त आशय का प्रस्ताव पारित हो जाएगा। परवेज मुशर्रफ ने न्यायाधीधों को बर्खास्त कर देश में आपातकाल लागू कर दिया था, जब सैन्य शासक के रूप में उनके दुबारा चुने जाने के संबंध में निवर्तमान राष्ट्रीय तथा प्रांतीय असेंबलियों में उन्हें चुनौती दी गई थी। इस मामले में उस समय सुप्रीमकोर्ट का फैसला आने ही वाला था। उस वक्त सुप्रीमकोर्ट द्वारा सैन्य शासक पद पर उनके दुबारा चुने को रद्द करने की व्यापक संभावना जताई जा रही थी।
 

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