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लेजर किरणें छुड़ाएंगी धूम्रपान
की लत
jagran --
08/12/2008 06:29 PM
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नई दिल्ली। धूम्रपान से होने वाले नुकसान की फेहरिस्त लंबी
है। लेकिन, जो लोग धूम्रपान छोड़ना चाहते हैं उनके लिए 'लेजर' आशा की एक किरण
साबित हो सकती है।
राजधानी के कुछ अस्पतालों में धूम्रपान से निजात दिलाने के लिए लेजर तकनीक का
इस्तेमाल किया जा रहा है। चिकित्सकों का दावा है कि इस विधि का शरीर पर कोई
दुष्प्रभाव नहीं पड़ता। एक्यूपंचर पर आधारित इस उपचार में शरीर पर
बायो-स्टीमुलेटिव इफेक्ट [जैव उद्दीपक प्रभाव] डाला जाता है जिससे धूम्रपान की
तलब पर अंकुश लगाने में मदद मिलती है।
न्यू लुक लेजर क्लीनिक के परिचय उपाध्याय के मुताबिक निकोटिन या तंबाकू की लत
शरीर में एंडोमार्फीन की कमी होने से लगती है। इस इलाज में निकोलाइट लेजर की
किरणें शरीर के प्रभावित अंग पर डाली जाती हैं जिससे एंडोमार्फीन का स्तर बढ़
जाता है और व्यक्ति सिगरेट पीना छोड़ देता है। गौरतलब है कि शरीर में नाक, कान,
माथे, कलाई, बांहों और अंगुलियों पर कुल मिलाकर 31 उद्दीपक बिन्दु पाए जाते
हैं। जो लोग धूम्रपान के ज्यादा लती होते हैं उन्हें आधे-आधे घंटे के दो उपचार
सत्रों की जरूरत पड़ती है।
परिचय का कहना है कि जो लोग धूम्रपान छोड़ने की दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ आते हैं
उन्हें दूसरे सत्र के बाद उपचार की जरूरत नहीं पड़ती। विशेषज्ञों का दावा है कि
इस उपचार में प्रयोग होने वाले लेजर वजन घटाने या कास्मेटिक सर्जरी में
प्रयुक्त होन वाले लेजर के मुकाबले नर्म होते हैं जिससे इनमें दुष्प्रभाव का
खतरा कम होता है।
अमेरिका में धूम्रपान पुनर्वास केंद्र से जुड़े संजय निझर का कहना है कि वह इस
तकनीक से लगभग 100 लोगों का इलाज कर चुके हैं। साथ ही इस तकनीक से किसी भी
प्रकार के साइड इफेक्ट जैसे अवसाद, तेज बुखार और व्यग्रता भी नहीं होते। संजय
सलाह देते हैं कि उपचार के दौरान शुरुआत में शरीर में दर्द जैसी तकलीफ होती है
जिसके लिए पैदल चलना और विटामिन की मात्रा लेना लाभदायक रहता है।
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